चुनौतियों से निपटने की राह सुझाता है धर्मपाल का साहित्य

कांधला (शामली) साहित्यकार धर्मपाल गुप्ता का जन्म शताब्दी समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान राजनीति और साहित्य की शीर्ष हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने भी अपना शुभकामना संदेश भेजा।
कस्बे के लाला चंदन लाल नेशनल इंटर कॉलेज के सभागार में शुक्रवार को कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री और बागपत सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि कांधला जैसे कस्बे में पैदा हुए और पढ़े धर्मपाल जैसी विराट शख्सियत के व्यक्ति, अग्रिम पंक्ति के साहित्यकार व स्वतंत्रता सेनानी को वैसी पहचान नहीं मिली जैसी मिलनी चाहिए थी। अपने उम्दा लेखन व गांधीवादी चिंतन के बावजूद वह वैसी ख्याति नहीं पा सके, जिसके वह वास्तविक हकदार थे। उनका साहित्य भारत के प्राचीन वैभव तथा वर्तमान की चुनौतियों से निपटने की राह सुझाता है।
पद्मश्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि कांधला के एक बड़े सपूत को आज याद करने का एतिहासिक दिन है जो आज तक अपने कस्बे के लोगों के लिए अनसुना था। पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह ने कहा भारत की समृद्ध प्राचीन विरासत और ग्रामीण भारत के अनपढ़ लुहार की कला और लोहे से खेती के औजार बनाने की कला का कोई सानी नहीं। खादी ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ. यशवीर सिंह ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि जन्म शताब्दी के बावजूद आजतक इलाके का जन सामान्य धर्मपाल जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा से अनजान है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि छोटे कस्बे में पैदा हुए धर्मपाल सामान्य साहित्यकार नहीं थे। यदि गांधी के विस्तृत अहिंसा और स्वराज के विचार को समझना है तो उनका साहित्य सरल साधन है।
कार्यक्रम का संयोजन अमित खादी ग्रामोद्योग संस्थान के मंत्री राजेंद्र चौहान और कलस्यान मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ शिवम चौहान ने धर्मपाल शोध पीठ के सहयोग से किया। अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. महेश शर्मा और संचालन अंशिका राज चौहान ने किया। उप राष्ट्रपति एम. वैंकेया नायडू ने भी अपना शुभकामना संदेश भेजा। मौके पर धर्मपाल की पुत्री और गांधी शोध संस्थान जलगांव की निदेशक गीता धर्मपाल ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये।